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शरदीय नवरात्रा शंखनाद के साथ बिखर रही है धूप, अगरबत्ती की सुगंध

दुर्गा मंदिर एवं पूजा पंडालों में पूजा अर्चना के लिए जुट रहे हैं भक्त

कोडरमा। शारदीय नवरात्र के तिसरे दिन शक्ति के तिसरे स्वरूप मां चन्द्रघंटा की श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना की गई। विभिन्न पूजा पंडालों व दुर्गा स्थानों में शक्ति की उपासना की गई। वहीं पूजा पंडालों, घरों एवं मंदिरों में शतचंडी पाठ का आयोजन किया जा रहा है। कई स्थलों पर रामायण पाठ की भी शुरुआत हो रही है। नगर के धार्मिक संगठन श्री हनुमान संकीर्तन मंडल के द्वारा नितिन मिश्रा के निवास स्थल पर भक्ति संध्या का आयोजन किया गया। जहां गायक कलाकारों ने अमृत की बरसे बदरिया अंबे मां की दुअरिया……, मैया के द्वार पर जिसने भी सर झुकाया है….., जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्त भक्ति के सागर में गोता लगाते रहे। वही काली महिला मंडल भी अपने पदाधिकारियों और सदस्यों के निवास स्थल पर नवरात्रा को लेकर घर-घर में भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित कर रही है। कोविड-19 के नियम के तहत कम संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और बिना ध्वनि विस्तारक यंत्र के ही कार्यक्रम में चार चांद लग रहा है। तालियों की गुंज पर श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आ रहे हैं।

विभिन्न दुर्गा स्थानों पर सरकार के निर्देश का पालन करते हुए हो रही पूजा अर्चना

दूसरी ओर नवरात्र को लेकर झंडा चैक स्थित दुर्गा मंदिर, विष्णुपुर रोड स्थित दुर्गा मंदिर , विभिन्न पूजा समितियों में स्थापित होने वाले मां दुर्गा की प्रतिमा और गायत्री मंदिर तथा निवास स्थलों पर मां अंबे की प्रतिमा एवं तस्वीरों के समक्ष दीपक प्रज्वलित कर सुख समृद्धि की कामना कर रहे हैं। वहीं पूरे अभ्रकांचल क्षेत्र के झुमरी तिलैया, कोडरमा डोमचांच, जयनगर, मरकच्चो, सतगावां एवं चंदवारा के विभिन्न इलाकों में मंत्रोच्चारण से कार्यक्रम स्थल गूंज रहे हैं। घर-घर में शंखनाद होने लगा है। पूजा पाठ की वजह से पूरा अभ्रक नगरी भक्ति में नजर आने लगा है। धूप, अगरबत्ती की सुगंध भी मिल रही है। सरकारी गाइडलाइन के तहत श्रद्धालु भक्त सुरक्षा को ध्यान में रखकर सारे अनुष्ठानों को संपन्न कराने की कोशिश कर रहे हैं। मंदिरों, घरों, पंडालों में प्रतिदिन सुबह से ही पूजा अर्चना शुरू हो जा रही है और मां दुर्गा सप्तशती के श्लोक गूंज रहे हैं।

पूजा समितियों ने नहीं दिया पंडाल को कोई स्वरूप

कोविड-19 के कारण इस वर्ष किसी भी पूजा समितियों के द्वारा पंडालों को कोई स्वरूप नहीं दिया जा रहा है और ना लाइटिंग का नजारा देखने को मिलेगा और ना हीं मेला ठेला लगेगा। प्रतिमा को अंतिम रूप देने में मूर्तिकार जुटे हुए हैं। वहीं इस वर्ष पूजा पंडालों में भक्ति जागरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नाटक एवं विभिन्न झांकियों की प्रस्तुति नहीं होने का मलाल लोगों को है। कुछ एक स्थल पर नवरात्र को लेकर डांडिया कार्यक्रम की शुरुआत हुई है, लेकिन बड़े पैमाने पर इस वर्ष कोई आयोजन नहीं हो रहा है।

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