हाथरस की घटना से कम दर्दनाक नहीं है ईटासानी गांव की घटना

  • हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद एसपी, एसडीपीओ हुए खामोश
  • धनवार के साथ-साथ परसन पुलिस की दिखी लापरवाही
  • पूर्व एसपी ने भी नहीं लिया था मामले को गंभीरता से, परसन पुलिस अब भी आॅनर्र किलिंग साबित करने के प्रयास में
  • हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद पीड़ित परिजनों की बढ़ी न्याय की उम्मीद

गिरिडीह। यूपी के हाथरस की घटना का गुस्सा अभी तक देश में ठंडा भी नहीं हुआ था। कि शुक्रवार को न्यायलय द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद गिरिडीह के धनवार थाना क्षेत्र के परसन ओपी के ईटासानी गांव की घटना पूरे राज्य में सुर्खियों में आ गई। हाईकोर्ट के कड़ी टिप्पणी के बाद ईटासानी गांव की पीड़िता को किस हद तक न्याय मिल पाएगा। यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। लेकिन जो मामले निकल कर सामने आए है, उसके अनुसार धनवार के ईटासानी और हाथरस की घटना में कोई फर्क नही है। अतंर सिर्फ इतना है कि हाथरस की घटना में पीड़िता के शव को हाथरस प्रशासन और पुलिस ने जबरन रात के अंधेरे में बगैर परिजनों के दाह-संस्कार कर दिया था। वहीं ईटासानी की घटना रैप के बाद नाबालिग पीड़िता की हत्या के दुसरे दिन 31 मार्च को धनवार पुलिस ने मृतिका के शव को परिजनों के हवाले कर दिया।

पुलिस ने मामले का रूख मोड़ बनाया आॅर्नर किलिंग का मामला

फिलहाल जो बातें सामने निकल कर आई है। उस पर गौर करें, तो जिले के पूर्व एसपी समेत धनवार थाना और परसन ओपी पुलिस की लापरवाही साफ तौर पर नजर आ रहा है। धनवार के परसन ओपी पुलिस ने अनुसंधान भी सही तरीके से नहीं किया। अब स्थिति यह है कि परसन ओपी की पुलिस ने मामले का रुख मोड़ते हुए मामला आॅनर्र किलिंग का बता दिया। लिहाजा, हाईकोर्ट ने इसी पर तल्लख टिप्पणी भी किया है। क्योंकि पीड़िता के पिता शंकर पासवान ने धनवार थाना पुलिस को आवेदन रैप और हत्या का आरोप लगाकर आठ आरोपियांे के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

आरोपी के खिलाफ दर्ज हुआ था धारा 302 और 376 के तहत मामला

बताया जाता है कि रैप व हत्या की घटना को सिर्फ एक युवक पिंटू पासवान ने अंजाम दिया था। लेकिन जब परिजनों ने उसे घर के बाहर खदेड़ कर दबोचा। तो आरोपी पिंटू पासवान को पीड़िता के परिजनों से सात आरोपी छोड़ाकर ले गए थे। जिसमें मुख्य आरोपी के पिता इंदर पासवान, चाचा वीरेन्द्र पासवान, सीताराम पासवान, भोला पासवान, जीतेन्द्र पासवान, गोलू उर्फ दीपंकर पासवान और रोबिन पासवान शामिल है। लिहाजा, पिंटू पासवान के खिलाफ जहां रैप व हत्या के आरोप में धारा 302 और 376 के तहत धनवार थाना कांड संख्या 63/20 दर्ज किया गया था। वहीं केस में आरोपी पिंटू पासवान को छोड़ाकर ले जाने के आरोप में अलग धारा में नामजद अभियुक्त बनाया गया था। हाईकोर्ट के कड़ी टिप्पणी के बाद अब मामला जब काफी हाईप्रोफाईल हो गया है। हालांकि इस मामले में एसपी अमित रेणु और खोरीमहुआ के एसडीपीओ नवीन सिंह भी बोलने से बच रहे है। लेकिन परसन ओपी प्रभारी रमाकांत उपाध्याय अब भी मामले को आॅनर्र किलिंग साबित करने के प्रयास करने में लगे है।

अनुंसधान के दौरान पुलिस ने पीड़िता के परिजनों को ही फंसाया

लेकिन परसन पुलिस ने पीड़िता और उसके परिजनों को इंसाफ दिलाने के बजाय अनुसंधान के दौरान पीड़िता के परिजनों को ही आॅनर्र किलिंग यानि, पीड़िता के हत्या के आरोप में फंसा दिया। पीड़िता की मां और चाचा बूदों लाल पासवान से बात करने पर उन्होंने पूरे मामले में धनवार थाना की पुलिस और परसन ओपी पुलिस को जिम्मेवार बताते हुए कहा कि सिर्फ दो आरोपी फरार है। जबकि छह आरोपी अब भी घर पर है। लेकिन परसन पुलिस इन आरोपियों को अब भी दबोचने से कतरा रही है।

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