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अतिवीर स्टील समूह में इनकम टैक्स की कार्रवाई दुसरे दिन भी जारी, कार्रवाई खत्म होने में लगेगे दो दिन और

कई सवालों का सही जवाब नहीं मिलने पर समूह के निदेशकों पर अधिकारियों ने किया कड़ी नाराजगी जाहिर

मामला 10 सालों के टैक्स चोरी का, नोट गिनने के लिए लगाएं गए दो मशीन

गिरिडीहः
अतिवीर टीएमटी कंपनी समूह के गिरिडीह समेत कोलकाता, धनबाद, जैनामोड़ के ठिकानों पर दुसरे दिन गुरुवार को भी आयकर विभाग की छापेमारी जारी रहा। दो दिनों के कार्रवाई में इनकम टैक्स के अधिकारियों ने टैक्स चोरी का 10 सालों का मामला पकड़ा है। लेकिन टैक्स चोरी कितना पकड़ा गया है। यह बताने से विभाग के अधिकारियों ने इंकार कर दिया है। इनकम टैक्स सूत्रों की मानें तो अतिवीर के ठिकानों में दो दिनों के छापेमारी की कार्रवाई में नगद रुपये मिलने की बात सामने आई है। जिसे गिनने के लिए ही विभाग को दो मशीनों का सहारा लेना पड़ा। फिलहाल, जिस स्तर पर अतिवीर समूह में आयकर विभाग की छापेमारी कार्रवाई हो रही है। उसे लेकर पूरे जिले में जबरदस्त चर्चा है। खास तौर पर लौह आधारित औद्योगिक इकाईयों के बीच। क्योंकि टैक्स चोरी का मामला पिछले 10 सालों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। आॅपरेशन इंचार्ज रांची के संयुक्त आयकर निदेशक मनीष झा के निर्देश पर धनबाद आयकर विभाग के उपनिदेशक आशीष कुमार अब खुद भी गिरिडीह के नगर थाना के पीछे धरियाडीह स्थित सरावगी आवास में रहकर पूरे आॅपरेशन की लीड कर रहे है। इनकम टैक्स सूत्रों की मानें तो अतिवीर समूह के मालिक संतोष सरावगी और उनके बेटे गुड्डु सरावगी से कई मामलों में पूछताछ भी की गई है।


आयकर विभाग के सूत्र यह भी बता रहे है कि दुसरे दिन ही टैक्स चोरी से जुड़े एक सवाल का संतुष्टिपूर्ण नहीं रहने पर विभाग के अधिकारियों ने समूह के निदेशक पर कड़ी नाराजगी भी जाहिर किया है। आयकर विभाग के इन्वेस्टिंग विंग को कंपनी के मालिकों द्वारा सहयोग नहीं किए जाने पर नाराजगी जाहिर किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि अधिकारिक रुप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाया है। लिहाजा, यह तय माना जा रहा है कि अब तक जितने दस्तावेज को सील किए गए है। उसे तो विभागीय अधिकारी खंगाल ही रहे है। साथ ही अतिवीर समूह के खिलाफ कार्रवाई अगले दो दिनों तक जारी रह सकता है। इनकम टैक्स सूत्रों की मानें तो अधिकारियों ने समूह के दोनों निदेशकों से पूछा है कि आखिर 10 सालों में समूह द्वारा और किन चीजों के पीछे पैसे निवेश किए गए। ऐसे में यह तो तय है कि कार्रवाई खत्म होने के बाद अगर टैक्स चोरी का मामला करोड़ो से अधिक हो तो, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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