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गिरिडीहः मधुबन के टेसाफूली गांव में पुलिस पिकेट निर्माण का आदिवासियों ने किया विरोध, कहा सही व्यवहार नहीं करती पुलिस

पांरपरिक हथियाारों के साथ किया प्रदर्शन

गिरिडीहः
प्रस्तावित पुलिस पिकेट के खिलाफ शुक्रवार को गिरिडीह के मधुबन थाना क्षेत्र टेसाफूली गांव में काफी संख्या में ग्रामीणों ने पांरपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन किया। आदिवासियों के इन प्रदर्शन का नेत्तृव मांझी हड़ाम कर रहा था। प्रदर्शन में टेसाफूली समेत आसपास के काफी ग्रामीण तीर-धनुष के साथ जुटे। और इस दौरान टेसाफूली में पहले ग्रामीणों की बैठक हुई। एक साथ काफी संख्या में जुटे ग्रामीणों का कहना था कि टेसाफूली के समीप लटकट्ो में पहले से पुलिस पिकेट संचालित हैै। जबकि कुछ दूरी पर सीआरपीएफ कैंप और पारसनाथ पहाड़ में भी सीआरपीएफ का कैंप चल रहा है। जहां काफी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान रहते है। लिहाजा, टेसाफूली में अब किसी पुलिस पिकेट के निर्माण की फिलहाल कोई जरुरत नहीं है। बतातें चले कि पीरटांड-डुमरी का पूरा इलाका ही माओवादियों का गढ माना जाता है। इसे पहले भी इन इलाकों में सीआरपीएफ कैंप और पुलिस पिकेट निर्माण को लेकर ग्रामीणों द्वारा विरोध होता रहा है। इधर टेसाफूली गांव में पुलिस पिकेट निर्माण के खिलाफ जुटे ग्रामीण महिलाओं में विनीता देवी, बुधनी देवी, महाकिस्कू और निर्मल किस्कू की मानें तो गांव के जिस प्लाॅट पर पुलिस पिकेट का निर्माण किया जाना है। वह पूरा इलाका रैयती प्लाॅट के दायरे में आता है। अब सरकार रैयती प्लाॅट को कब्जे में कर पिकेट और सीआरपीएफ कैंप का निर्माण किस प्रकार कर सकती है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों का कहना था। अब सीएम हेंमत सोरेन और जिला प्रशासन को आवेदन सौंप कर पुलिस पिकेट निर्माण का विरोध किया जाएगा। क्योंकि इन इलाकों में पिकेट और कैंप के निर्माण से महिलाओं व युवतियों को परेशानी उठाना पड़ता है। अक्सर महिलाएं और युवतियां पशु चराने के लिए जाती है तो जवानों द्वारा महिलाओं के साथ अभ्रण व्यवहार किया जाता है। महिलाओं का यह भी कहना था कि गांव के इसी प्लाॅट पर ही महिलाएं और युवतियां अक्सर शौच के लिए जाती है। इस पर भी इन जवानों को लेकर महिलाओं में असुरक्षा का भावना बना रहता है।
इधर प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने नगाड़ा और मांदर बजाकर जहां अपना विरोध जताया। वहीं पांरपरिक हथियारों का प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से पिकेट निर्माण के प्रस्ताव को हटाने का मांग किया। बताते चले कि गांव के स्कूल को फिलहाल कैंप का शक्ल देकर सीआरपीएफ जवानों को रखा गया है। स्कूल में कैंप होने के कारण बच्चों की पढ़ाई भी खराब हो रही थी। इसके बाद ही पुलिस मुख्यालय ने फैसला लिया कि जल्द ही गांव में पुलिस पिकेट का निर्माण किया जाएगा।

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