दो महीने बाद भी नहीं हो सका भाजपा गिरिडीह जिला समिति का विस्तार

  • अपने-अपने समर्थकों को कमेटी में शामिल कराने को लेकर दो दिग्गजों का दबाव झेल रहे जिलाध्यक्ष
  • सांसद व पूर्व सांसद की चली तो भगवा गाड़ी में बिन सीट के सवारी बन सकते हैं कई संघी
मनोज कुमार पिंटू
गिरिडीह। कोरोना काल में भाजपा गिरिडीह जिला अध्यक्ष की कमान थामने वाले महादेव दुबे दो महीने बाद भी जिलासमिति का विस्तार नहीं कर सके हैं। ऐसे में जिले के भाजपाईयों में नाराजगी है। जिला कमेटी के विस्तार नहीं होने का मूल कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। जबकि अध्यक्ष महादेव दुबे हर बार प्रदेश अध्यक्ष का हवाला देकर रटा-रटाया जवाब देते आ रहे हैं कि जिला कमेटी की सूची बन चुकी है। इसे अनुमोदन के लिए प्रदेश अध्यक्ष को भेजा गया है। मामला प्रदेश नेतृत्व के पास अटका हुआ है।
जिला कमिटी का विस्तार नहीं होने से कार्यकर्ता नाराज

फिलहाल जिला कमेटी का विस्तार नहीं होने से गिरिडीह के भाजपा कैडरों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। नाराज भाजपाई पार्टी के प्रोटोकॉल का हवाला देकर जिलाध्यक्ष महादेव दुबे पर मनमानी करने का आरोप लगा रहे हैं। हैरान करने वाली बात तो ये है कि दो महीने बीतने को हैं, लेकिन जिलाध्यक्ष पर प्रदेश नेतृत्व से भी जिला कमेटी के विस्तार करने को लेकर कोई दबाव नहीं पड़ रहा है। जिला कमेटी की सूची में खुद का नाम देखने का सपना पाले लोगों के अरमान इसमें देर होने से पिघल रहे हैं।

जिले के कई चेहरे जिला समिति में खुद को शामिल किये जाने की पैरवी पार्टी के रसूखदार नेताओं से कराने में लगे हैं तो कुछ वैसे भाजपाई जो पहले जिला कमेटी में पद संभाल चुके हैं, वे सीधे तौर पर जिलाध्यक्ष महादेव दुबे की परिक्रमा भी कर रहे है। जिलाध्यक्ष महादेव दुबे भी यह जान रहे हैं कि कुछ पुराने चेहरे उनके आगे-पीछे सिर्फ इसलिए घूम रहे हैं कि उन्हें पद मिल सकें। लिहाजा, वो अपना पत्ता नहीं खोल रहे।

टूट सकते हैं कुछ के सपने

पार्टी सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्ष पर कोडरमा की सांसद अन्नपूर्णा देवी और पूर्व सांसद रवींद्र राय का खास दबाव है कि जिलाध्यक्ष जिला कमेटी में उनके खास समर्थकों के नाम शामिल करें। इसमें अब तक जिन नामों की चर्चा सबसे अधिक है, उसमें पूर्व नगर अध्यक्ष संजीत सिंह पप्पू, जिला महामंत्री बंसत भोक्ता के नाम प्रमुख हैं। क्योंकि दोनों चेहरे पूर्व सांसद रवींद्र राय के बेहद करीबी माने जाते है। वहीं दूसरे नामों की बात करें तो अन्नपूर्णा देवी के करीबी और कोडरमा सांसद प्रतिनिधि दिनेश यादव के नाम की भी चर्चा है। ऐसे में जिला कमेटी की सूची में नाम शामिल कराने में पार्टी के इन दोनों दिग्गजों की भूमिका सफल रही तो पहले से उम्मीद पाले कई भाजपाईयों के सपने टूटते देर नहीं लगेंगे।

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