थारू का साधने में जुटी पार्टियां

बिहार। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की 94 सीटों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रचार अभियान तेज कर दिए हैं। सभी पार्टियां लोक लुभावन वायदों के आधार पर अपनी झोली में अधिक से अधिक सीट भरना चाह रहे हैं। ऐसे में वर्षाें से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही जातियों को भी सभी पार्टियां लुभाने के प्रयास कर रहे हैं।

पश्चिम चंपारण में निवास करती है तीन लाख की आबादी

वर्षों से आरक्षण की मांग करने वाली थारू जनजाति पर भी पार्टियों की नजर है। नेपाल से सटे बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में निवास करने वाली थारू जनजाति की करीब तीन लाख की आबादी है। यह जनजाति पहले ओबीसी में हुआ करती थी। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में इन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा देते हुए एक फिसदी आरक्षण का लाभ दिया गया। वहीं थारू जनजाति पांच फिसद आरक्षण की मांग को लेकर लगातार मुखर रही है। अब इस जनजाति को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण का लाभ देने का वायदा कर साधने का प्रयास किया है।

तीन विधानसभा के लिए किंगमेकर है थारू जनजाति

थारू जनजाति चंपारण के वाल्मीकि नगर संसदीय क्षेत्र के लिए किंगमेकर समझे जाते हैं। यह जनजाति वाल्मीकी नगर संसदीय क्षेत्र में आने वाले तीन विधानसभा क्षेत्र वाल्मीकी नगर, रामनगर और सिकटा में किसी भी प्रत्याशी को जिताने का माद्वा रखते हैं। इस जनजाति को साधने वाले तीन विधानसभा सीट जीत सकते हैं। ऐसे में इस जनजाति को साधना हरेक दल के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।

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