नहीं रहे कांग्रेस के संकट मोचन अहमद पटेल, कोरोना के कारण हुई मौत

  • अहमद के बेटे फैजल ने ट्वीट कर उनके निधन की दी जानकारी
  • एक अक्टूबर को कोरोना संक्रमित हुए थे अहमद पटेल
  • अहमद पटेल 3 बार लोकसभा सांसद और 4 बार राज्यसभा सांसद बने
  • प्रधानमंत्री ने कहा अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए याद किए जाएंगे अहमद पटेल

नई दिल्ली। पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले कांग्रेस नेता अहमद पटेल का 71 साल की उम्र में बुधवार की सुबह निधन हो गया। गुजरात से राज्यसभा सांसद रहे पटेल 1 अक्टूबर को कोरोना संक्रमित हुए थे। उन्हें 15 अक्टूबर को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पटेल ने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी देते हुए अपने सभी करीबियों और संपर्क में आने वाले लोगों से खुद को आइसोलेट करने और कोविड टेस्ट कराने की अपील की थी। अहमद के बेटे फैजल ने ट्वीट में बताया कि ‘बड़े दुख के साथ मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरे पिता अहमद पटेल का बुधवार अहले सुबह 3.30 बजे निधन हो गया है। करीब एक महीने पहले उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी और उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। अल्लाह उन्हें जन्नत फरमाए।’

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

कांग्रेस नेता अहमद पटेल के निधन की सूचना मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा कि ‘अहमद पटेल जी के निधन से दुखी हूं। उन्होंने कई साल सार्वजनिक जीवन में समाज के लिए काम किया। उन्हें अपने तेज दिमाग के लिए जाना जाता था। कांग्रेस को मजबूत करने के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे। मैंने उनके बेटे फैजल से बात की है। उनकी आत्मा को शांति मिले।’

गांधी परिवार से रहा काफी नजदिक संबध

कांगे्रस के कद्दावर नेता माने जाने वाले पटेल सोनिया गांधी के सबसे करीबी सलाहकारों में शामिल थे। पटेल की गिनती कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेताओं में होती थी, लेकिन वे कभी सरकार का हिस्सा नहीं रहे। गांधी परिवार से पटेल की नजदीकियां इंदिरा गांधी के समय से ही थी। 1977 में जब वे सिर्फ 28 साल के थे, तो इंदिरा गांधी ने उन्हें भरूच से चुनाव लड़वाया था। हालांकि कांग्रेस में उनका कद 1980 और 1984 के वक्त उस वक्त और बढ़ गया जब इंदिरा गांधी के बाद जिम्मेदारी संभालने के लिए राजीव गांधी को तैयार किया जा रहा था। तब अहमद पटेल राजीव गांधी के करीब आए। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी 1984 में लोकसभा की 400 सीटों के बहुमत के साथ सत्ता में आए थे और पटेल कांग्रेस सांसद होने के अलावा पार्टी के संयुक्त सचिव बनाए गए थे।

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