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कोयला तस्करी : 110 पुलिस अफसरों से सीबीआई करेगी पूछताछ

  • कोयला तस्कर लाला को सहयोग करने वालों पर सीबीआई सख्त
  • -अनुप माजी उर्फ लाला रहा है झारखंड-बंगाल में कोयला तस्करी का किंगपिन
  • -110 पुलिस अफसरों को समन भेजने की तैयारी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो
  • -झारखंड व बंगाल के 525 पत्रकार भी हैं सीबीआई की रडार पर

कोलकाता/गिरिडीह। झारखंड-बंगाल में कोयला तस्करी का किंगपिन अनुप माजी उर्फ लाला के सिंडिकेट से सांठ गांठ रखने वालों पर सीबीआई की नजर है। एक दिन पहले बुधवार को कोयला कारोबार के नाम पर तस्करी करने के आरोपी संजय गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने पुरुलिया में छापेमारी की। लेकिन वो हाथ नहीं लगा। सीबीआई की कार्रवाई से कोयला तस्करी को सपोर्ट करने वालों के हाथ पांव फुलने लगे हैं। झारखंड और पश्चिम बंगाल में काम करने वाले कुछ पत्रकार व पुलिस अफसरों में भी हड़कंप है।
सीबीआई सूत्रों की मानें तो करीब 525 पत्रकारों व 110 पुलिस पदाधिकारियों के नाम सीबीआई के हाथ लगे हैं जो अनुप माजी के सिंडिकेट से सांठ गांठ रखते थे। रोजाना सैकड़ों करोड़ के कोयले का कारोबार करने वाले अनुप माजी के सिंडिकेट से किस तरह यह जुड़े, क्या करते थे, किस तरह अनुप माजी के धंधे को आगे बढ़ाने में मदद करते थे सब कुछ सीबीआई खंगाल रही है। खबर तो यह भी है कि झारखंड व पश्चिम बंगाल के उन सभी 525 पत्रकारों व 110 पुलिस पदाधिकारियों से सीबीआई पूछताछ कर सकती है। जल्द ही उन्हें पूछताछ के लिए समन भेज कर कोलकाता के निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय बुलाया जा सकता है।


संथाल परगना से भी जुड़ा है तार


लाला के कोयला तस्करी के साम्राज्य से संथाल परगना भी जुड़ा हुआ है। संथाल परगना के गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, दुमका के अलावा झारखंड के धनबाद, गिरिडीह और पश्चिम बंगाल के आसनसोल, बर्दवान, दुर्गापुर, पुरुलिया से जिन पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों के नाम सीबीआई के हाथ लगे हैं वे किसी न किसी रूप से अनुप माजी उर्फ लाला के अवैध कारोबार को फलने फुलने में मदद करते थे। कईयों ने इस सिंडिकेट के संपर्क में आकर करोड़ों रुपये कमाये।


लाला विदेश न भाग पाये, कोशिश में सीबीआई


काफी मशक्कत के बावजूद अनुप माजी सीबीआई के हाथ नहीं लगा है। सीबीआई ने अनुप माजी के विदेश भागने के सभी रास्ते भी बंद कर दिये हैं। उसके पासपोर्ट, वीजा पर सीबीआई की पैनी नजर है। झारखंड के कई कारोबारी अनुप माजी की सिंडिकेट में पश्चिम बंगाल से सटे झारखंड के धनबाद, गिरिडीह व जामताड़ा के कई अवैध कोयला कारोबारी हैं। सिंडिकेट के सहयोगियों पर भी सीबीआई की नजर है।


अनुप माजी इस तरह बन गया लाला


अनुप के लाला बनने की कहानी राजनीति से प्रभावित है। लाला का सियासी रसूखदारों से भी नाता रहा है। वह धनबाद में पहले श्भगवाश् था और अब श्हराश् भी हो गया है। लाला का सियासी असर ऐसा है कि उसे दीदी का दुलरूआ बताया जाता है तो मोटा भाई से भी उसके नाते ढूंढे जाते हैं। गृह मंत्री का काफिला बंगाल आया था तो लाला पर आईटी का फंदा पड़ा। अब सीबीआई मामले को खंगाल रही है। बंगाल में लाला की तलाश में 45 ठिकानों पर रेड पड़े हैं। मामले में ईसीएल के सिक्योरिटी अधिकारी पर भी एफआईआर हुआ है। क्योंकि बिना लोक उपक्रम के अधिकारियों को अभियुक्त बनाये कानून का लंबा हाथ लाला तक पहुंचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। बंगाल में लाला को टीएमसी का फंड मैनेजर बताया जाता है तो झारखंड में उसके रिश्ते सत्ता और विपक्ष से एक समान बताये जाते हैं। लाला के लिए जाति, मजहब और सियासी झंडों का रंग कोई फैक्टर नहीं हैं। टीएमसी के इस फंड रेजर को धनबाद के उद्यमी, नेता और धनबाद से लेकर दुमका तक के पुलिस महकमे के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों का भी संरक्षण प्राप्त रहा है। झारखंड के कई रसूखदार आज भी सीमा पार कर लाला के ही गेस्ट बनकर रहते हैं। अनुप माजी से लाला बनते-बनते कोयला तस्करी के इस किंग पिन ने 3 कोयला मंत्री देख लिये। इसी दौर में अनुप पर केस हुए तो नेताओं, पुलिस और पत्रकारों के लिए वह लाला बनकर उभर गया।

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