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गिरिडीह में कैसे हो अपराध में नियंत्रण, जब पुलिस विभाग में मैनपावर और संसाधनों की है बेहद कमी

डकैती कांड के शिकार भुक्तभोगी फर्नीचर कारोबारी को अब तक मिला सिर्फ नेताओं के आश्वासान की घुट्टी

कांग्रेस के प्रर्देश अध्यक्ष मिले कारोबारी से और पुलिस की सुस्ती पर भड़के

गिरिडीहः
बढ़ते अपराधिक घटनाओं पर कांग्रेस के प्रर्देश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने गिरिडीह पुलिस पर तो जमकर भड़के। और पुलिस की सुस्ती के खिलाफ डीजीपी से शिकायत की बात कह बैठे। लेकिन प्रर्देश अध्यक्ष राजेश ठाकुर लोगों को यह कहना भूल गए कि पुलिस सुस्त हो चुकी है। तो जिले में पुलिस मंे मैनपावर के साथ संसाधनों की कमी भी इसके लिए जिम्मेवार है। क्योंकि जिला मुख्यालय के नगर और मुफ्फसिल थानों का क्षेत्रफल बड़ा है। जबकि मैनपावर और संसाधन उतने रह नहीं गए। जितना की रहना चाहिए। इतना ही नही हर माह संथाल पगरना के लिए रांची से मंत्री और वीवीआईपी के आने-जाने का दौर लगातार जारी रहता है। तो दोनों थानों की पुलिस को भी उन वीवीआईपी की सुरक्षा के लिए स्काॅट वाहन और पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद कराना पड़ता है। लिहाजा, समझा जा सकता है कि फिर शहर से लेकर अपराध नियंत्रण करना कितना बड़ा चुनौती है। यही कारण है कि बीतें गुरुवार की मध्य रात को शहर के कांग्रेस कार्यालय के बगल से फर्नीचर कारोबारी उत्तम गुप्ता के के घर से 25 लाख से अधिक की भीषण डकैती हो गई। लेकिन अब तक इस डकैती कांड के सारे अपराधी पुलिस गिरफ्त से बाहर है। भुक्तभोगी के घर अब तक सिर्फ सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू और कांग्रेस अध्यक्ष समेत कई पार्टी के नेताओं ने आश्वासन की सिर्फ घूंटी ही पीलाया।
पुलिस सूत्रों की मानें तो मुफ्फसिल थाना मंे थाना प्रभारी के बाद जहां एक दर्जन से अधिक एएसआई और एसआई है। तो वहीं 60 की संख्या में आम्र्स जवान प्रतिनियुक्त है। तो सात वाहन थाना को दिया गया है। लेकिन हर माह इन वाहनों से इलाके मंे गश्ती के लिए ढाई सौ से तीन लीटर ईधन ही उपलब्ध कराया जाता है। जबकि ये नाकाफी है। क्योंकि मुफ्फसिल थाना के इलाके से हर माह मंत्री और वीआईपी का आवागमन के साथ इलाके में गश्ती करते हुए चाौकसी करना इतने कम ईधन से संभव नहीं। जबकि क्षेत्रफल के साथ मुफ्फसिल थाना की आबादी साढ़े चार लाख से अधिक है।


वैसे नगर थाना का हाल तो और खराब है। जहां थाना प्रभारी के बाद सिर्फ नौ एसआई और एएसआई की प्रतिनियुक्ती है। तो 40 की संख्या में पुलिस जवान की प्रतिनियुक्ती है। सबसे अधिक परेशानी वाहनों का है। पुलिस सूत्रों की मानें तो एक पीसीआर समेत नगर थाना के पास सिर्फ चार वाहन है। इन वाहनों से ही दिन और रात की गश्ती के बाद किसी खास छापेमारी के लिए पुलिस को अक्सर शहर छोड़कर दुसरे थानों में भी जाना पड़ता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि करीब ढाई लाख से अधिक की आबादी के शहरी क्षेत्र को अपराध से पूरी तरह मुक्त रखना इस हालात में कितना संभव है।

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