गिरिडीह के गुरुद्वारे में धूमधाम से मनाया गया चाौथे गुरु रामदास जीत महाराज का प्रकाशोत्सव, पटियाला के रागी जत्था हुए शामिल
गिरिडीहः
सिखों के चाौथे गुरु गुरु रामदास जी महाराज का 488वां प्रकाशोत्सव शनिवार को गिरिडीह के प्रधान गुरुद्वारे में धूमधाम से मनाया गया। रामदास जी महाराज के प्रकाशोत्सव को लेकर गुरुद्वारे की सजावट जहां आर्कषक तरीके से किया गया था। तो वहीं गुरुद्वारे में दरबार भी सजाया गया था। प्रकाशोत्सव गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान सेवक अमरजीत सिंह सलूजा के नेत्तृव में मनाया गया। इस दौरान पंजाब के पटियाला से आएं रागी जत्था भाई जसकरण सिंह ने अटूट आस्था के साथ शब्द-र्कीतन कर रामदास जी महाराज का जीवन दर्शन श्रद्धालुओं के बीच कराया। शब्द-र्कीतन के माध्यम से रागी जत्था भाई जसकरण सिंह ने रामदास जी महाराज के जीवन का वर्णन करते हुए बताया कि पंजाब में अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की स्थापना इनके द्वारा किया गया था। प्रकाशोत्सव पर्व को लेकर ही पिछले 48 घंटे से अनवरत चल रहे अखंड पाठ का समापन हुआ, तो दोपहर में शब्द-र्कीतन का दौर शुरु हुआ। हर एक सिख श्रद्धालु महाराज रामदास जी के भक्ति में लीन में नजर आया।

इधर पूर्व प्रधाान सेवक अमरजीत सिंह सलूजा ने चाौथे गुरु रामदास जी महाराज के जीवन से जुड़ी जानकारी देते हुए बताया कि अमृतसर में स्वर्णमंदिर की स्थापना के साथ 30 रागो में 638 रचनाओं भी लिखी। जबकि अधंविश्वास के साथ जातिप्रथा और कुरीतियों का विरोध किया। शब्द-र्कीतन के बाद गुरुद्वारे में लंगर का आयोजन किया गया। जिसमें सिख समुदाय के कई दुसरे समुदाय के श्रद्धालु शामिल हुए। इधर प्रकाशोत्सव को सफल बनाने में सतवविंदर सिंह सलूजा, तरणजीत सिंह सलूजा, जोरावर सलूजा, ऋषि सलूजा, हरमिंदर सिंह बग्गा, देवेन्द्र सलूजा, गुरदीप सिंह बग्गा, रोबिन चावला, चरणजीत सिंह सलूजा समेत कई सदस्यों का महत्पूर्ण योगदान रहा।