मनरेगा में जाति और मनुवादी एडवाइजरी का विरोध

दलित शोषण मुक्ति मंच ने मनाया विरोध दिवस

कोडरमा। मनरेगा में जाति और मनुवादी एडवाइजरी के खिलाफ सोमवार को ढेबुआडीह, झरीटांड़ में दलित शोषण मुक्ति मंच (डीएसएमएम) के बैनर तले विरोध दिवस मनाया गया। गौरतलब है कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान का अलग अलग जातियों की श्रेणी में विभाजित करने के लिए कहा गया है। इसका मतलब है कि श्रमिकों की अलग अलग श्रेणियां होगी और उनके लिए अलग अलग फंड ट्रांसफर और एक अलग श्रम बजट होगा। डीएसएमएम के जिला सचिव महेन्द्र तुरी ने कहा कि यह एडवाइजरी मनरेगा अधिनियम के बुनियादी समझ के साथ साथ समान वेतन के अधिकार का उलंघन है। कहा कि इससे एसटी एससी के अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। कहा कि यह भाजपा व आरएसएस का जातीय व मनुवादी एजेंडा को लागू करने की साजिश है। जिलाध्यक्ष दिनेश रविदास ने कहा कि केंद्र सरकार की ही रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में मनरेगा में काम करने वालों में 50 फिसदी से ज्यादा महिलाएं और 40 फिसदी से ज्यादा दलित और आदिवासी तबकों से जुड़े मजदूर हैं। मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के सामाजिक वर्गीकरण का रिकॉर्ड पहले से ही सरकार के पास है और इसका पता करने के लिए मजदूरी भुगतान को श्रेणीकरण से जोड़ना जरूरी नहीं है। श्रेणीकृत भुगतान के पीछे मोदी सरकार की वास्तविक मंशा पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। डीएसएमएम ने मांग करते हुए कहा कि मंत्रालय इस एडवाइजरी को तुरंत वापस ले और सभी मनरेगा मजदूरों को समय पर मजदूरी भुगतान के साथ 200 दिनों का काम दिवस और न्यूनतम 600 रूपये मजदूरी देने की गारंटी करे।

ये थे मौजूद

कार्यक्रम में भोला तुरी, मनोज तुरी, गणेश तुरी, भीखी तुरी, राहुल तुरी, उमेश तुरी, हरी तुरी, गोविन्द तुरी, संदीप तुरी, कृष्णा तुरी, गोखुल तुरी, जगदीश तुरी, कुसमी देवी, मुनवा देवी, गीता देवी, गंगिया देवी, शान्ति देवी, सोना देवी, आरती देवी, देमिया देवी आदि शामिल थी।

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