आजादी के संघर्ष में कम्युनिस्टों ने दी है भारी कुर्बानियां दी: बृंदा करात

  • स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवशाली इतिहास और हमारे सामने चुनौतियां विषय पर आयोजित सेमिनार का हुआ आयोजन

कोडरमा। इतिहास का यह गौरवशाली अध्याय है कि आजादी के संघर्ष में कम्युनिस्टों ने भारी कुर्बानियां दी है। इतना ही नहीं पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव भी कांग्रेस के अधिवेशन में कम्युनिस्ट समुह ने ही रखा था जिसे पारित कराने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ीं थी। ब्रिटिश शासन के दौर में लाहौर, कानपुर, मेरठ षडयंत्र केश के नाम पर जो सैकड़ों क्रांतिकारियों ने सेल्युलर जेल (काला पानी) की सजा काटी थी उनमें सबसे बड़ी संख्या कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़े लोगों की थी। उक्त बातें माकपा राज्य कमिटी बैठक के बाद आज़ादी के 75वर्ष के अवसर पर स्वतंत्रता आंदोलन की गौरवशाली इतिहास और हमारे सामने चुनौतियां विषय पर आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए पार्टी की पालिट ब्यूरो सदस्य बृंदा कारात ने कही।

कहा कि आज जब स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के मौके पर सत्ता में बैठी पार्टी हर घर तिरंगा का नारा देकर राशन की दुकानों से तिरंगा झण्डा बेचने का काम कर रही है। तिरंगा हमारा राष्ट्रीय ध्वज है जो हमारी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। पिछले 75 वर्षों से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर देश के आम नागरिक अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर शान से तिरंगा फहराते आ रहें हैं। असल में तथ्य यह है कि आजादी की लड़ाई में तथाकथित सांस्कृतिक संगठन आरएसएस की कोई भूमिका नहीं थी. इतना ही नहीं इनके नागपुर मुख्यालय में भी 2021 तक राष्ट्रीय झंडा तिरंगा नहीं फहराया जाता था।

कहा कि आज स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर हमें शपथ लेना है कि हम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बनी इस देश के जनता की एकता की शानदार विरासत को आगे बढ़ाते हुए शासक वर्ग द्वारा धार्मिक आधार पर लोगों को बांटने की साज़िश को परास्त करेंगे।
सेमिनार को संबोधित करते हुए पार्टी के दुसरे पालिट ब्यूरो सदस्य डॉ रामचंद्र डोम ने कहा कि भाजपा का कथित राष्ट्रवाद नकली है और वह अपने राजनीतिक फायदे के लिए इसका दुरूपयोग करती है। इनका देश के संविधान पर भी विश्वास नहीं हैं, क्योंकि जब भारत गणराज्य का संविधान तैयार किया जा रहा था उस वक्त इनके पूर्वज नागरिकों को समानता का अधिकार देने वाले भारत के संविधान की जगह समाज के वंचित समुदायों और महिलाओं को गुलाम बनाने वाले मनु स्मृति को लागू किए जाने की पुरजोर वकालत कर रहे थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला सचिव असीम सरकार ने की। वहीं सेमिनार में माकपा सचिव प्रकाश विप्लव, राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान, रमेश प्रजापति, महेन्द्र तुरी, भीखारी तुरी, ग्यासुद्दीन अंसारी, परमेश्वर यादव, मुकेश यादव, रविन्द्र भारती, अशोक रजक के अलावा सीपीआई के जिला सचिव प्रकाश रजक, माले के जिला सचिव राजेन्द्र मेहता, वामपंथी नेता प्रेम प्रकाश, उदय द्विवेदी, चरणजीत सिंह, बिनोद विश्वकर्मा, महावीर शर्मा, कांको के मुखिया और जेएमएम नेता श्यामदेव यादव, प्रकाश चंद्र राय, आंगनबाड़ी संघ की मीरा देवी, वर्षा रानी, संध्या वर्नवाल, उर्मीला देवी, सहिया संघ की अंजु देवी, कलावती देवी, डीवाईएफआई के बासुदेव साव सहित सैंकड़ों लोग सेमीनार में मोजूद थे।

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