प्रधान गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाया गया आठवें गुरु हरभजन सिंह का प्रकाशोत्सव

  • अखंड पाठ और शब्द कीर्तन में शामिल सिख समाज के लोग

गिरिडीह। सिखों के आठवें गुरु गुरु हरभजन सिंह का 366वां प्रकाशोत्सव रविवार को गिरिडीह के प्रधान गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाया गया। शहर के स्टेशन रोड स्थित प्रधान गुरुद्वारा में आठवें गुरु हरभजन सिंह के प्रकाशोत्सव की रौनक भी रही। क्योंकि झारखंड की प्रसिद्ध रागी जत्था माता गुजरी रागी जत्था ने जिस प्रकार का शब्द कीर्तन पेश की। की पूरे गुरुद्वारा में भक्ति का एक माहोल भी बन गया। सुबह शुरू हुए शब्द कीर्तन का दौर दोपहर तक चलता रहा और सिख समुदाय के भक्तों की भीड़ भी जुटती गई। इस दौरान महिलाओं से लेकर पुरुष और युवक युवतियां भी शब्द कीर्तन के साथ अखंड पाठ में शामिल हुई।

प्रधान गुरुद्वारा के प्रधान सेवक डॉक्टर गुणवंत सिंह मोंगिया ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरु हरभजन सिंह पूरे सिख समुदाय के बीच लोकप्रिय है। ईशा पूर्व साल 1665 में गुरु हरभजन सिंह का जन्म हुआ था। वहीं महज पांच साल की उम्र में इन्हे गुरु की गद्दी मिली थी। इतना ही नही बल्कि पूरे समाज के लिए गुरु हरभजन सिंह ने मानवता के लिए जो कार्य किया। वो शायद किसी ने किया। जब पूरा देश चेचक की महामारी से पीड़ित था, तो गुरु हरभजन सिंह ने चेचक को अपने जान पर लिया और मानवता की रक्षा की।

अखंड पाठ और शब्द कीर्तन में डॉक्टर अमरजीत सिंह सलूजा, तरनजीत सलूजा, सतविंदर सिंह सलूजा, जोरावर सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह सलूजा, ऋषि सलूजा, सरदार नरेंद्र सिंह समेत कई श्रद्धालु शामिल हुए।

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